सवाना प्रदेश या सूडान तुल्य प्रदेश (Savanna Region or Sudan Type Region)

 सवाना प्रदेश या सूडान तुल्य प्रदेश (Savanna Region or Sudan Type Region)

1. स्थिति एवं विस्तार

उष्ण कटिबंधीय घास क्षेत्र का सर्वाधिक विस्तार अफ्रीका के सूडान प्रदेश में है जहाँ सवाना नामक मोटी लम्बी घासें अधिक उगती हैं। इसी कारण इस प्रदेश को सवाना घास क्षेत्र के नाम से जाना जाता है। सूडान तुल्य प्रदेश 10 deg से 20 deg उत्तरी अक्षांश और 10 deg से 20 deg दक्षिणी अक्षांश के मध्य उत्तरी तथा दक्षिणी दोनों गोलाद्धों में पाये जाते हैं। इस प्रकार के घास प्रदेश पूर्वी अफ्रीका में सूडान (सवाना), कीनिया तथा बूगाण्डा, दक्षिणी अमेरिका में कोलम्बिया (लानोज) और ब्राजील (कम्पास) तथा आस्ट्रेलिया के क्वीन्सलैण्ड प्रांत में पाये जाते हैं।

2. प्राकृतिक दशाएँ

वर्ष भर ऊँचा तापमान, स्पष्ट शुष्क और आर्द्र ऋतुएं सवाना जलवायु की प्रमुख विशेषताएं हैं। ग्रीष्मकाल में तापमान 30 deg से 38 deg सेल्सियस पाया जाता है किन्तु शीत ऋतु में भी तापमान सामान्यतः 20 deg सेल्सियस से ऊपर रहता है। इस प्रदेश में शुष्क ऋतु लम्बी (7-8 महीने) होती है और उस अवधि में प्रायः वर्षा का अभाव रहता है। सम्पूर्ण वार्षिक वर्षा का 80 से 90 प्रतिशत तक आर्द्र वर्षा ऋतु में ही प्राप्त होता है। भूमण्डल के विभिन्न सवाना प्रदेशों में वर्षों की मात्रा में पर्याप्त अंतर पाया जाता है जो धरातलीय बनावट तथा भूमध्य रेखा से दूरी के कारण होता है। विभिन्न प्रदेशों में औसत वार्षिक वर्षा 75 से 200 सेमी, होती है।

सवाना प्रदेश में मोटी, कड़ी और लम्बी घासों की प्रधानता होती है। घासों की पत्तियां चपटी होती हैं और इनकी ऊंचाई (लम्बाई) 80 सेमी, या इससे भी अधिक पायी जाती है। इनमें हाथी घास (Elephant grass) सबसे ऊँची होती है जिसकी ऊँचाई 5 मीटर तक होती है और इसमें हाथी भी छिप जाते हैं। इन घासों का तना गूदेदार होता है। सवाना प्रदेश में समस्त धरातल घासों के सतत आवरण से आच्छादित नहीं होता है बल्कि बीच-बीच में नग्न धरातल भी मिलता है। शुष्क मौसम में घासों की पत्तियों गिर जाती हैं और आर्द्र मौसम आते ही इनमें पुनः हरी पत्तियाँ तेजी से निकल आती हैं। इन घासों की जड़े लम्बी होती हैं जो पर्याप्त गहराई तक मिट्टी में प्रविष्ट हो जाती हैं। घास क्षेत्रों के बीच-बीच में बिखरे रूप में झाड़ियाँ और वृक्ष भी उगते हैं। वृक्षों का स्वभाव जल की सुलभता पर निर्भर करता है। वृक्षों की सामान्य ऊँचाई 10 से 15 मीटर तक होती है जिनके तनों से छोटी-छोटी शाखाएं निकलती हैं। क्षेत्र विशेष में घासों तथा वृक्षों के अनुपात के आधार पर सवाना क्षेत्र को 4 प्रकारों में विभक्त किया जा सकता है।(1) वन सवाना (Forest Savanna), (ii) वृक्ष सवाना (Tree Savanna), (iii) झाड़ी सवाना (Shrub Savanna), और (iv) घास सवाना (Grass Savanna)i

अफ्रीकी सवाना में चरने वाले बड़े जन्तुओं की सबसे अधिक किस्में पायी जाती है। यहाँ जेब्रा, जिराफ, ऐन्टीलोप, हिप्पोपोटमस, हिरणों तथा हाथियों के बड़े-बड़े झुण्ड पाये जाते हैं। अमेरिका तथा आस्ट्रेलियाई सवाना में उक्त जन्तु कम मिलते हैं और पक्षियों की संख्या अधिक मिलती है। आस्ट्रेलिया में स्थलीय बड़े जन्तुओं में कंगारू का प्रभुत्व है। सवाना प्रदेशों में विस्तृत घास क्षेत्र तथा वृक्षों की संख्या कम होने के कारण जन्तुओं में गतिशीलता अधिक पायी जाती है।

3. मानव प्रतिक्रिया

सूडान तुल्य प्रदेशों में घासों की उपलब्धता, वर्षा की मात्रा, मिट्टी की उर्वरता आदि के अनुसार कृषि

और पशुपालन यहाँ के लोगों का प्रमुख व्यवसाय है। अनेक स्थानों पर घासों को समाप्त करके उस प्रकार विभिन्न प्रकार की फसलें उगायी जाती हैं जबकि अधिकांश भागों पर पशुचारण व्यवसाय प्रचलित है। फसलों में चावल, मक्का, दालें, मोटे अनाज आदि प्रमुख हैं। पूर्वी अफ्रीका (कीनिया एवं तंजानिया) के घास प्रदेश में ‘मसाई’ जनजाति के लोगों की अधिकता

है जो पशु मुख्यतः पैसे पालते हैं। इसके अतिरिक्त गायों तथा भेड़-बकरियों को भी पाला जाता है और

उन्हें चारागाहों पर चराया जाता है। मसाई पशुपालक अपने पशुओं के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान

के लिए भ्रमण करते रहते हैं। प्रत्येक मसाई परिवार का अलग-अलग पशुओं का झुण्ड होता है। मसाई

लोग भैंस और गाय को दूध के लिए पालते हैं और भेड़ तथा बकरियों को मांस और ऊन प्राप्त करने के

लिए पालते हैं। स्थानीय उपलधि के अनुसार मसाई के भोजन में मांस और दूध का महत्वपूर्ण स्थान है।

अफ्रीका की अन्य आखेटक जनजातियों की अपेक्षा मसाई की आर्थिक स्थिति तथा सामाजिक संगठन

अधिक सुदृढ़ है। दक्षिण अमेरिका में ब्राजील के पठार (कम्पास) तथा कोलम्बिया के ओरीनोको बेसिन

के पासों को साफ करके मक्का, जौ, बाजरा, गन्ना आदि की कृषि की जाने लगी है। कृषक कृषि के

साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं। आस्ट्रेलिया के क्वींसलैण्ड के घास क्षेत्र में पशुचारण व्यवसाय को

विकसित किया गया है जो वहाँ के पर्यावरण के अनुकूल है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top